
भाजपा ने आठ नए प्रदेश प्रवक्ताओं की घोषणा की है, जिनमें अनुकृति को कोटद्वार क्षेत्र से जिम्मेदारी दी गई है। पहली नजर में यह संगठन के मीडिया तंत्र का विस्तार लगता है, लेकिन इसके बड़े राजनीतिक मायने हैं।
अनुकृति वर्ष 2022 में कांग्रेस के टिकट पर लैंसडाउन से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं और अप्रैल, 2024 में भाजपा में शामिल हुईं थीं। अब प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी भूमिका महज संगठनात्मक नहीं रह गई है। उन्हें प्रदेश के राजनीतिक विमर्श में लगातार मौजूद रहने का मंच मिलेगा। सरकार के फैसलों का बचाव करना हो या कांग्रेस के हमलों का जवाब देना अब अनुकृति भाजपा के पक्ष की मुखर आवाज होंगी
एक ओर श्वसुर हरक सिंह रावत कांग्रेस के मंच से भाजपा पर निशाना साधेंगे, वहीं बहू अनुकृति उनके हमलों का भाजपा के मंच से जवाब देंगी। उत्तराखंड की राजनीति में परिवार के भीतर दो अलग राजनीतिक ध्रुवों का यह दृश्य अपने आप में असाधारण है। रिश्ते वही हैं, लेकिन राजनीतिक रास्ते अलग हैं और अब दोनों को जनता के बीच अपनी-अपनी सियासी निष्ठा भी साबित करनी होगी।
बहू और ससुर, दोनों की होगी सियासी परीक्षा
यदि अनुकृति लगातार प्रदेश के मुद्दों पर मुखर होती हैं, गढ़वाल की राजनीति में सक्रियता बढ़ाती हैं और संगठन में अपनी उपयोगिता साबित करती हैं तो धीरे-धीरे उनकी पहचान हरक की बहू से आगे निकल सकती है। यही स्थिति हरक के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है। हरक की राजनीतिक पूंजी वर्षों का अनुभव, क्षेत्रीय संपर्क और गढ़वाल की राजनीति में बनाई गई पकड़ है।
अनुकृति के पास इसके मुकाबले नई पीढ़ी का चेहरा, महिला होने का राजनीतिक लाभ और अब भाजपा का मजबूत संगठनात्मक मंच है, फिलहाल नए राजनीतिक रिश्तों में श्वसुर और बहू दोनों को सियासी परीक्षा देनी होगी। हरक के लिए चुनौती यह होगी कि उनकी राजनीतिक पकड़ परिवार कांग्रेस के पक्ष में कितनी प्रभावी साबित होती है। वहीं अनुकृति के लिए चुनौती यह होगी कि वह भाजपा में अपनी पहचान कितनी जल्दी और कितनी मजबूती से स्थापित कर पाती हैं।






